सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने से संबंधित चुनौतियाँ (Challenges in Achieving Sustainable Development Goals (SDG))
युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता (War and Political Instability): सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता है। रूस और यूक्रेन जैसे प्रमुख संसाधन उत्पादक देशों में संघर्ष के कारण वैश्विक खाद्यान्न संकट उत्पन्न हुआ है। इस तरह के संघर्षों से स्वास्थ्य देखभाल (SDG 3) और शिक्षा (SDG 4) जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी प्रभावित होती हैं, विशेष रूप से युद्धग्रस्त क्षेत्रों में।
आर्थिक असमानताएँ (Economic Inequalities):
अक्सर विकासशील देश अपनी आर्थिक वृद्धि के लिए वानिकी, खनन और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर रहते हैं, जो सतत विकास के लक्ष्यों जैसे जलवायु लक्ष्यों (SDG 13) के साथ सीधे संघर्ष में आ जाते हैं। धनी देश धारणीयता की दिशा में काम कर रहे हैं, परंतु गरीब देशों में धन और प्रौद्योगिकी की कमी सतत विकास की राह में बड़ी बाधा बन रही है।
सरकारी प्राथमिकताएँ (Governmental Priorities)
कई सरकारें स्थिरता के बजाय अल्पकालिक आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देती हैं। उदाहरण के तौर पर, जीवाश्म ईंधन लॉबिंग के कारण प्रदूषणकारी उद्योगों को बंद करना कठिन हो जाता है। ऐसे में, बेरोज़गारी (SDG 8) और गरीबी (SDG 1) जैसी समस्याएँ भी बढ़ जाती हैं।
गरीबी और असमानता (Poverty and Inequality):
वर्तमान में लगभग 650 मिलियन लोग भुखमरी से ग्रस्त हैं और 10% से अधिक आबादी को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध नहीं है। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDG 1: गरीबी उन्मूलन, SDG 7: स्वच्छ ऊर्जा) की प्राप्ति में मुख्य बाधाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और रोज़गार के अवसरों की कमी असमानता (SDG 10) को और बढ़ा रही है।
वैश्विक आर्थिक संकट (Global Economic Crisis):
कोविड-19 महामारी ने सतत विकास के लक्ष्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे लाखों लोग फिर से गरीबी में आ गए हैं। अकेले दक्षिण पूर्व एशिया में 5 मिलियन लोग गरीबी की श्रेणी में आ गए हैं, जिससे वर्षों की प्रगति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। साथ ही, वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे संकटों ने व्यापार साझेदारों के साथ सतत विकास में बाधा डाली है।
आगे की राह (The Way Forward):
संघर्ष समाधान (Conflict Resolution):
संयुक्त राष्ट्र द्वारा युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मध्यस्थता और शांति पहलों का विस्तार करना सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
सतत विकास लक्ष्यों हेतु वित्तपोषण (Funding for SDG):
विकसित देशों को अपनी 0.7% GDP सहायता प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए ताकि सतत विकास लक्ष्यों के लिए प्रतिवर्ष 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए जा सकें। इसके अतिरिक्त, निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रभाव निवेश और SDG बॉण्ड के माध्यम से वित्तपोषण किया जा सकता है।
देश-विशिष्ट रणनीतियाँ (Country-Specific Strategies):
हर देश को अपने सबसे ज़रूरी SDG पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, भारत को लैंगिक समानता (SDG 5) और असमानता में कमी (SDG 10) पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बहु-हितधारक सहयोग (Multi-Stakeholder Collaboration)
ESG रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाने से कॉर्पोरेट SDG प्रतिबद्धताओं को मज़बूती मिलेगी। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों का उपयोग SDG निगरानी को और प्रभावी बना सकता है।
इस प्रकार, इन चुनौतियों का समाधान और बहु-आयामी दृष्टिकोण से SDG की दिशा में प्रगति की जा सकती है।